मंगलवार, 25 दिसंबर 2018
शफिये महशर
हज़रात अनस (रज़िअल्लाहु अन्हो) से एक तवील रिवायत बयान फ़रमाई हुज़ूर नबी-ए-अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (ﷺ) ने इरशाद फ़रमाया,
जब क़यामत का दिन होगा तो लोग इखट्टा कर हज़रात आदम (अलैहिस्सलाम) के पास हाज़िर होंगे और अर्ज़ करेंगे के आप अपने रब की बारगाह में हमारी शफ़ाअत कीजिये, वह फरमायेंगे इसके लिए मैं नहीं, लेकिन तुम हज़रात इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का दमन पकड़ो क्युकी वो अल्लाह के खलील हैं, तो वो हज़रात इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के पास जायँगे तो वो भी फरमायेंगे मैं इसके लिए नहीं हूँ, लेकिन तुम सय्यदीना मूसा (अलैहिस्सलाम) के पास जाओ क्युकी वो अल्लाह के कलीम हैं वो फरमायेंगे मैं इसके लिए नहीं, लेकिन तुम हज़रात ईसा (अलैहिस्सलाम) की बारगाह में जाओ क्युकी वो रूहुल्लाह है वो भी फरमायेंगे मैं इसलिए नहीं हूँ, लेकिन तुम हज़रात सय्यदीना मुहम्मद मुस्तफा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (ﷺ) की बारगाह में चले जाओ, वह मेरे पास आएंगे मैं फ़रमाऊँगा, “मैं ही तो शफ़ाअत करने के लिए हूँ” फिर मैं अल्लाह तआला से इज़ाज़त तलब करूँगा तो मुझे इज़ाज़त मिलेगी और अल्लाह ताला मेरे क्लब में ऐसी हम्द डालेगा के जो मेरे इल्म में हाज़िर नहीं,
मैं उन हम्दो से हम्द करूँगा और अल्लाह के हुज़ूर सजदे में गिर जाऊंगा, कहा जायेगा “आएकी जायगी” मैं अर्ज़ करूँगा
“या रब मेरी उम्मत मेरी उम्मत”
तो फ़रमाया जायगा जाइये और अपनी उम्मत के हर शख्स को जहन्नम से निकल लीजिये जिसके दिल में जाव के बराबर भी ईमान हो मैं जाऊंगा और उन्हें निकल लाऊंगा फिर वापस आऊंगा और उन्ही हम्दो से रब की हम्द करूँगा फिर दोबारा रब तआला के हुज़ूर सजदे में गिर जाऊंगा कहा जायेगा,
“ए मुहम्मद सर उठाइये कहिये आपकी सुनी जायगी मांगिये अता किया जायगा शफ़ाअत कीजिये कबूल की जायगी” मैं अर्ज़ करूँगा,
“या रब मेरी उम्मत मेरी उम्मत”
तो फ़रमाया जायगा जाइये और अपनी उम्मत के हर शख्स को जहन्नम से निकल लीजिये जिसके दिल में राइ के दाने के बराबर भी ईमान हो मैं जाऊंगा और उन्हें निकल लाऊंगा, फिर वापस आऊंगा और उन्ही हम्दो से रब की हम्द करूँगा फिर दोबारा रब ताला के हुज़ूर सजदे में गिर जाऊंगा कहा जायेगा,
“ए मुहम्मद सर उठाइये कहिये आपकी सुनी जायगी मांगिये अता किया जायगा शफ़ाअत कीजिये कबूल की जायगी” मैं अर्ज़ करूँगा
“या रब मेरी उम्मत मेरी उम्मत”
तो फ़रमाया जायगा जाइये और जिसके दिल में राइ के दाने से Bhi कमतर ईमान हो, उससे भी आग से निकल लीजिये, चुनाचे मैं जाऊंगा और ऐसा ही करूँगा”
(सहीह बुखारी, Vol :09, किताबत तौहीद, बाब : कलम अल-रब्बी यौम अल-कियामती, हदीस : 7510)
(सहीह मुस्लिम Vol : 01, Page : 307, किताबुल ईमान, बाब : ىندأ ُلهأ ُةنجلا ُةلزنم ﺎهيف, हदीस : 311)
(मिरातुल मानजीह सहारा-ए-मिश्कत अल-मासबीह Vol : 07, Page : 417)
(सहीह मुस्लिम Vol : 01, Page : 307, किताबुल ईमान, बाब : ىندأ ُلهأ ُةنجلا ُةلزنم ﺎهيف, हदीस : 311)
(मिरातुल मानजीह सहारा-ए-मिश्कत अल-मासबीह Vol : 07, Page : 417)
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