मंगलवार, 26 मार्च 2019

उर्स ए जाफर अस सिद्दीक (कूडे)

आपका नाम जाफर सादिक़ ओर उपनाम अबू मुहम्मद है
आपका नसब -इमाम जाफर s/o इमाम बाकर s/o इमाम जैनुल आबेदीन s/oइमाम हुसैन s/o इमाम अली
(सल्लमुअल्ला अलैह) है
आपकी वालिदा साहेबा (माँ)हज़रत अबू बकर अस सिद्दीक की नवासी थी
इस निस्बत से आप आप हज़रत सिद्दीक ए अकबर के नवासे हुए

दे कर वापस नही लेते
किसी शख्स की दीनार की थैली खो गई ,
उसने आप पर इल्ज़ाम लगाया ,आपने उससे पूछ-" उसमे कितने दीनार थे "
उसने कहा- "2000 दीनार
आपने उसे अता कर दिए
बाद में रुपये की थैली मिल गई
वो शक्स आपके पास आकर माफी मांगते हुए रुपये वापस करने लगा
आपने फरमाया -"हम किसी को दे कर वापस नही लेते
इरशाद ए जाफरी
★जो इंसान इबादत पे गुरुर करे वो गुनाहगार ओर जो इंसान गुनाह पर नादिम हो वो अल्लाह का फरमान बरदार बंदा है
★करामात वाला वो है जो अपने नफ़्स से जिहाद करे क्योंकि ये अल्लाह तक पहुचने का रास्ता है
★जन्नत का हकदार वही है जो अपने सारे मामले अल्लाह के सुपुर्द कर दे
★अल्लाह का जिक्र की सही पहचान जब है कि तुम दुनिया को भूल जाओ
★खुसनसीबी ये भी है कि अक्लमंद दुश्मन से वास्ता पड़ जाए
जारी है...........

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