शुक्रवार, 22 मार्च 2019

वली की बरकत

हज़रत मालिक बिन दीनार का एक बार किसी नास्तिक से मुनाजरा हो गया ,दोनों अपने को सत्य पर कहते रहे यहाँ तक कि लोगो ने फैसला किया कि दोनों का हाथ आग में डाल दिया जाए जिसका हाथ नही जलेगा वो सत्य पर होगा, चुनांचे दोनों ने अपने हाथ आग पर रख दिये ,लेकिन दोनों में से किसी का हाथ नही जला ,आपने नाराज़ हो कर फरमाया -"या अल्लाह मेने तुझसे वफ़ा की ओर आज तूने मुझे एक नास्तिक के बराबर ला कर खड़ा कर दिया"
आवाज़ आई-"मालिक उसका हाथ तेरे हाथ की बरकत से नही जला ,अकेला हाथ डालता तो बेशक झुलस जाता"

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