गुरुवार, 27 दिसंबर 2018


अल्लाह ने नबी सल्लाहो अलैहि व सल्लम को ऐसे खासियतों से नवाजा है जो मुंफरीद ओर बे मिशाल ही नही बल्कि आला तरीन भी है आप सल्लाहो अलैहि व सल्लम के ये ख़साइश कुरान और हदीश में जा बजा जिक्र हुए है
इन इन ख़ासाइश ओर इम्तियाज़ के बदौलत ही हुज़ूर नबी करीम सल्लाहो अलैहि व सल्लम बाकी नबियो पर फ़ज़ीलत रखे हुए है
असल बात तो ये है कि हमारे आका सल्लाहो अलैहि व सल्लम के कमालात ओर शान इतनी बुलंद है कि उन को समझ पाना हमारी नाकिश अक्ल से बहार है
            इस लेख में हम   हुज़ूर सल्लाहो अलैहि व सल्लम की रोज़े महशर  जाहिर होने वाली  शान को कुरान ओर हदीस से बयान करेगे
खुदा का हबीब
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रजी अल्लाहो तलहा अन्हो से रिवायत है रसुल्लाह सल्लहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया-"सुन लो! मैं अल्लाह तआला का हबीब हु ओर मैं ये बात पर फक्र नही करता ,मैं कयामत के दिन हम्द का झंडा उठाने वाला हु और मैं ये बात फक्रिया नही कहता ,कयामत के दिन सब से पहले शफाअत करने वाला भी मैं ही हु आवर सब से पहले मेरी शफाअत काबुल की जाएगीऔर में ये बात फक्रिया नही कहता , सब से पहले जन्नत का कुंडा खटखटाने वाला में ही हु ,अल्लाह तआला मेरे लिए इसे खोलेगा ओर मुझे इस मे दाखिल फरमाएगा मेरे साथ फ़क़ीर व गरीब मोमिन होंगे और में ये बात फक्रिया नही कहता ,मैं अव्वलीन व आख़िरीन में सब से ज्यादा इज़्ज़त वाला हु ओर मैं ये बात फक्रिया नही कहता"
(तिर्मिज़ी शरीफ़)
कबरे अनवर से जहूर में अव्वलीन
हज़रत अनस बिन मालिक रजिल्लाहो तआला अन्हो से मरवी है रसुल्लाह सल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फरमाया-"जब लोगो को कब्र से उठाया जाएगा तो सब से पहले में कब्र से बाहर आऊँगा"(तिर्मिज़ी,दरमी)
ये हदीस एक और जगह दूसरे अल्फ़ाज़ के साथ भी मरवी है
फरमाया-"मैं सब से पहला इंसान होऊँगा जिस के (बाहर निकलने के)लिए(कब्रकी)जमीन शक होगी और में ये बात फक्रिया नही कहता"
(तिर्मिज़ी,)
एक और जगह है
फरमाया-"कयामत के दिन सब से पहले मेरी कब्र खुलेगी और मुझे इस पर फक्र नही
(दारमी ,नसाई)
70 हज़ार फरिश्तो के  मौजूदगी में ज़हूर
        
जारी है.......

देखनी है हश्र में इज़्ज़त रसुल्लाह की( सल्लाहो अलैहि व सल्लम)

मंगलवार, 25 दिसंबर 2018


हज़रात अनस (रज़िअल्लाहु अन्हो) से एक तवील रिवायत बयान फ़रमाई हुज़ूर नबी-ए-अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (ﷺ) ने इरशाद फ़रमाया,

जब क़यामत का दिन होगा तो लोग इखट्टा कर हज़रात आदम (अलैहिस्सलाम) के पास हाज़िर होंगे और अर्ज़ करेंगे के आप अपने रब की बारगाह में हमारी शफ़ाअत कीजिये, वह फरमायेंगे इसके लिए मैं नहीं, लेकिन तुम हज़रात इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का दमन पकड़ो क्युकी वो अल्लाह के खलील हैं, तो वो हज़रात इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के पास जायँगे तो वो भी फरमायेंगे मैं इसके लिए नहीं हूँ, लेकिन तुम सय्यदीना मूसा (अलैहिस्सलाम) के पास जाओ क्युकी वो अल्लाह के कलीम हैं वो फरमायेंगे मैं इसके लिए नहीं, लेकिन तुम हज़रात ईसा (अलैहिस्सलाम) की बारगाह में जाओ क्युकी वो रूहुल्लाह है वो भी फरमायेंगे मैं इसलिए नहीं हूँ, लेकिन तुम हज़रात सय्यदीना मुहम्मद मुस्तफा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) (ﷺ) की बारगाह में चले जाओ, वह मेरे पास आएंगे मैं फ़रमाऊँगा, “मैं ही तो शफ़ाअत करने के लिए हूँ” फिर मैं अल्लाह तआला से इज़ाज़त तलब करूँगा तो मुझे इज़ाज़त मिलेगी और अल्लाह ताला मेरे क्लब में ऐसी हम्द डालेगा के जो मेरे इल्म में हाज़िर नहीं,
मैं उन हम्दो से हम्द करूँगा और अल्लाह के हुज़ूर सजदे में गिर जाऊंगा, कहा जायेगा “आएकी जायगी” मैं अर्ज़ करूँगा
या रब मेरी उम्मत मेरी उम्मत”
तो फ़रमाया जायगा जाइये और अपनी उम्मत के हर शख्स को जहन्नम से निकल लीजिये जिसके दिल में जाव के बराबर भी ईमान हो मैं जाऊंगा और उन्हें निकल लाऊंगा फिर वापस आऊंगा और उन्ही हम्दो से रब की हम्द करूँगा फिर दोबारा रब तआला के हुज़ूर सजदे में गिर जाऊंगा कहा जायेगा,
“ए मुहम्मद सर उठाइये कहिये आपकी सुनी जायगी मांगिये अता किया जायगा शफ़ाअत कीजिये कबूल की जायगी” मैं अर्ज़ करूँगा,
या रब मेरी उम्मत मेरी उम्मत”
तो फ़रमाया जायगा जाइये और अपनी उम्मत के हर शख्स को जहन्नम से निकल लीजिये जिसके दिल में राइ के दाने के बराबर भी ईमान हो मैं जाऊंगा और उन्हें निकल लाऊंगा, फिर वापस आऊंगा और उन्ही हम्दो से रब की हम्द करूँगा फिर दोबारा रब ताला के हुज़ूर सजदे में गिर जाऊंगा कहा जायेगा,
“ए मुहम्मद सर उठाइये कहिये आपकी सुनी जायगी मांगिये अता किया जायगा शफ़ाअत कीजिये कबूल की जायगी” मैं अर्ज़ करूँगा
या रब मेरी उम्मत मेरी उम्मत”
तो फ़रमाया जायगा जाइये और जिसके दिल में राइ के दाने से Bhi कमतर ईमान हो, उससे भी आग से निकल लीजिये, चुनाचे मैं जाऊंगा और ऐसा ही करूँगा”
(सहीह बुखारी, Vol :09, किताबत तौहीद, बाब : कलम अल-रब्बी यौम अल-कियामती, हदीस : 7510)
(सहीह मुस्लिम Vol : 01, Page : 307, किताबुल ईमान, बाब : ىندأ ُلهأ ُةنجلا ُةلزنم ﺎهيف, हदीस : 311)
(मिरातुल मानजीह सहारा-ए-मिश्कत अल-मासबीह Vol : 07, Page : 417)

शफिये महशर